Practice Question and Answer
8 Q: 12 पार्सल का औसत वजन 1.8 किलो है। एक और नया पार्सल जोड़ने से औसत वजन 50 ग्राम कम हो जाता है। नए पार्सल का वजन क्या है?
1138 06220ea11b407d04826536d25
6220ea11b407d04826536d25- 11.50 किग्राfalse
- 21.10 किग्राfalse
- 31.15 किग्राtrue
- 41.01 किग्राfalse
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Answer : 3. "1.15 किग्रा"
Q:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नके उत्तर दीजिए :
इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
निम्नलिखित में से कौन - सा शब्द ' दुर्वह ' का समानार्थी है?
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621f4684b407d048264c73e3इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
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- 3असह्यtrue
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Answer : 3. "असह्य "
Q:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नके उत्तर दीजिए :
इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
‘बाढ़' के समान दिशाहीन ' वाक्यांश में रेखांकित पद है
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621f461130b5265430efcce7इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
- 1संज्ञाtrue
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Answer : 1. "संज्ञा "
Q:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नके उत्तर दीजिए :
इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
निम्न में से कौन - सा विकल्प जातिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा बनने का है?
1212 0621f451318802b47fa622540
621f451318802b47fa622540इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
- 1शून्यताfalse
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Answer : 4. "दासत्व "
Q:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नके उत्तर दीजिए :
इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
'संहारक' शब्द का संधि - विच्छेद है
1060 0621f442130b5265430efc381
621f442130b5265430efc381इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
- 1सम् + हारकtrue
- 2सम + हारकfalse
- 3सन + हारकfalse
- 4सन् + हारकfalse
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Answer : 1. "सम् + हारक "
Q:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए
महापुरुष लोग जब आते हैं हम, अच्छी तरह नहीं पहचान पाते, क्योंकि हमारा मन भीरू और अस्वच्छ है, स्वभाव शिथिल है, अभ्यास दुर्बल है. हमारे मन में वह क्षमता नहीं है जिससे हम महानता को पूरी तरह समझ सकें, उसको ग्रहण कर सकें. जो महापुरुष प्रेम देकर अपना परिचय देते हैं, उनको हम उनके प्रेम से किसी सीमा तक समझ भी सकते हैं. हम लोग समझ गए हैं कि,” गांधी जी हमारे हैं.” उनके प्रेम में ऊंच-नीच का अंतर नहीं है, मूर्ख और विद्वान का अंतर नहीं है, अमीर और गरीब का भेद नहीं है. उन्होंने अपना प्रेम सभी को समान रूप से वितरित किया है. उन्होंने कहा,” सबका कल्याण हो, सबका मंगल हो “. उन्होंने जो भी कहा है वह केवल बातों से नहीं कहा है अपितु दुख की वेदना से कहा है. उनका धैर्य देखकर, ममता देखकर, उनका संकल्प सिद्ध हो गया है, किंतु किसी प्रकार की जोर जबरदस्ती से नहीं अपितु त्याग द्वारा, दुख द्वारा, तपस्या द्वारा वह अपने संकल्प में सफल हुए
'महापुरुष' में प्रयुक्त समास का नाम क्या है?
1178 0621f40ba30b5265430efa1c2
621f40ba30b5265430efa1c2महापुरुष लोग जब आते हैं हम, अच्छी तरह नहीं पहचान पाते, क्योंकि हमारा मन भीरू और अस्वच्छ है, स्वभाव शिथिल है, अभ्यास दुर्बल है. हमारे मन में वह क्षमता नहीं है जिससे हम महानता को पूरी तरह समझ सकें, उसको ग्रहण कर सकें. जो महापुरुष प्रेम देकर अपना परिचय देते हैं, उनको हम उनके प्रेम से किसी सीमा तक समझ भी सकते हैं. हम लोग समझ गए हैं कि,” गांधी जी हमारे हैं.” उनके प्रेम में ऊंच-नीच का अंतर नहीं है, मूर्ख और विद्वान का अंतर नहीं है, अमीर और गरीब का भेद नहीं है. उन्होंने अपना प्रेम सभी को समान रूप से वितरित किया है. उन्होंने कहा,” सबका कल्याण हो, सबका मंगल हो “. उन्होंने जो भी कहा है वह केवल बातों से नहीं कहा है अपितु दुख की वेदना से कहा है. उनका धैर्य देखकर, ममता देखकर, उनका संकल्प सिद्ध हो गया है, किंतु किसी प्रकार की जोर जबरदस्ती से नहीं अपितु त्याग द्वारा, दुख द्वारा, तपस्या द्वारा वह अपने संकल्प में सफल हुए
- 1तत्पुरुष समासfalse
- 2कर्मधारय समासtrue
- 3अव्ययीभाव समासfalse
- 4बहुव्रीहि समासfalse
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Answer : 2. "कर्मधारय समास"
Q: योगात्मक मूल्यांकन का उपयोग इस प्रकार किया जाता है?
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621d09383e501f3ab0b79fec- 1सीखने का आकलनtrue
- 2सीखने में आकलनfalse
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- 4सीखने के रूप में आकलनfalse
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Answer : 1. "सीखने का आकलन "
Q: राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा, 2005 के अनुसार, शिक्षण अपने चरित्र में___________ और__________ है।
1150 0621d067b4e406d5e8a31e202
621d067b4e406d5e8a31e202- 1निष्क्रिय , सामाजिकfalse
- 2सक्रिय, सरलfalse
- 3सक्रिय, सामाजिकtrue
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