प्रश्न और उत्तर का अभ्यास करें

प्र:

राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायधीश के कितने पद स्वीकृत हैं?

863 0

  • 1
    40
    सही
    गलत
  • 2
    50
    सही
    गलत
  • 3
    60
    सही
    गलत
  • 4
    65
    सही
    गलत
  • उत्तर देखेंउत्तर छिपाएं
  • Workspace

उत्तर : 2. "50"
व्याख्या :

1. राजस्थान राज्य का उद्घाटन 30 मार्च, 1949 को हुआ और तत्समय जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर और अलवर में कार्यरत पाँच रियासतकालीन उच्च न्यायालयों को राजस्थान उच्च न्यायालय अध्यादेश, 1949 द्वारा समाप्त कर दिया गया और राजस्थान में उच्च न्यायालय, जोधपुर का उद्घाटन किया गया।

2. राजस्थान उच्च न्यायालय में 50 माननीय न्यायाधीशों की पद-संख्या अनुमोदित है।

प्र:

राजस्थान में राजस्व मण्डल की स्थापना कब हुई?

1182 0

  • 1
    1949
    सही
    गलत
  • 2
    1959
    सही
    गलत
  • 3
    1969
    सही
    गलत
  • 4
    1979
    सही
    गलत
  • उत्तर देखेंउत्तर छिपाएं
  • Workspace

उत्तर : 1. "1949"
व्याख्या :

1. संयुक्‍त राजस्‍थान राज्‍य के निर्माण के पश्‍चात महामहिम राजप्रमुख ने 7 अप्रैल 1949 को अध्‍यादेश की उद्घोषणा द्वारा राजस्‍थान के राजस्‍व मंडल (Board of Revenue for Rajasthan) की स्‍थापना की थी।

2. यह अध्‍यादेश 1 नवम्‍बर 1949 को प्रवर्तित हुआ था उसने बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, मत्‍स्‍य तथा पूर्व राजस्‍थान के राजस्‍व मंडलों का स्‍थान ले लिया हैं।

3. ये राजस्‍व मंडल विविध विधियों के अधीन रियासतों में कार्य कर रहे थे।

प्र:

प्रसिद्ध लोक देवता पाबूजी का जन्म कब हुआ था?

1386 0

  • 1
    1240
    सही
    गलत
  • 2
    1235
    सही
    गलत
  • 3
    1105
    सही
    गलत
  • 4
    1239
    सही
    गलत
  • उत्तर देखेंउत्तर छिपाएं
  • Workspace

उत्तर : 4. "1239"
व्याख्या :

1. पाबूजी का जन्म 1239 ईस्वी को कोलू (वर्तमान बाड़मेर, राजस्थान) में हुआ था। उनके पिता का नाम धांधल जी राठौड़ था। धांधल जी राठौड़ की चार संताने थी जिनमें से उनके दो पुत्र और दो पुत्रियां थी। उनके पुत्रों के नाम पाबूजी व बूरा थे तथा उनकी पुत्रियों के नाम सोना व पेमा था।

2. इतिहासकार मुहणौत नैणसी, महाकवि मोडजी आशिया व क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, पाबूजी राठौड़ का जन्म अप्सरा के गर्भ से हुआ था। उनके अनुसार पाबूजी का जन्म स्थान वर्तमान बाड़मेर शहर से 8 कोस आगे खारी खाबड़ के जूना नामक गांव था।

3. पाबूजी का पूजा स्थल कोलू (फलोदी) में है। यहां कोलू में ही प्रतिवर्ष उनका मेला भी भरता है। क्योंकि वे अपने विवाह के बीच में उठकर गायों को बचाने गए थे जिसकी वजह से उन्हें दूल्हे के वस्त्रों में दिखाया जाता है। उनका प्रतीक चिन्ह हाथ में भाला लिए अश्वारोही के रूप में प्रचलित है।

4. पाबूजी को ग्रामीण लोग लक्ष्मण जी का अवतार मानते हैं और लोकदेवता के रूप में पूजते हैं। जनमानस पाबूजी को ऊँटो के देवता के रूप में भी पूजती है।

5. पाबूजी की घोड़ी का नाम केसर कालमी था।

प्र:

पाबूजी की घोड़ी का नाम क्या था?

1549 0

  • 1
    लिलम
    सही
    गलत
  • 2
    मूमल
    सही
    गलत
  • 3
    केसर कलमी
    सही
    गलत
  • 4
    पेमल
    सही
    गलत
  • उत्तर देखेंउत्तर छिपाएं
  • Workspace

उत्तर : 3. "केसर कलमी"
व्याख्या :

1. पाबूजी का जन्म 1239 ईस्वी को कोलू (वर्तमान बाड़मेर, राजस्थान) में हुआ था। उनके पिता का नाम धांधल जी राठौड़ था। धांधल जी राठौड़ की चार संताने थी जिनमें से उनके दो पुत्र और दो पुत्रियां थी। उनके पुत्रों के नाम पाबूजी व बूरा थे तथा उनकी पुत्रियों के नाम सोना व पेमा था।

2. इतिहासकार मुहणौत नैणसी, महाकवि मोडजी आशिया व क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, पाबूजी राठौड़ का जन्म अप्सरा के गर्भ से हुआ था। उनके अनुसार पाबूजी का जन्म स्थान वर्तमान बाड़मेर शहर से 8 कोस आगे खारी खाबड़ के जूना नामक गांव था।

3. पाबूजी का पूजा स्थल कोलू (फलोदी) में है। यहां कोलू में ही प्रतिवर्ष उनका मेला भी भरता है। क्योंकि वे अपने विवाह के बीच में उठकर गायों को बचाने गए थे जिसकी वजह से उन्हें दूल्हे के वस्त्रों में दिखाया जाता है। उनका प्रतीक चिन्ह हाथ में भाला लिए अश्वारोही के रूप में प्रचलित है।

4. पाबूजी को ग्रामीण लोग लक्ष्मण जी का अवतार मानते हैं और लोकदेवता के रूप में पूजते हैं। जनमानस पाबूजी को ऊँटो के देवता के रूप में भी पूजती है।

5. पाबूजी की घोड़ी का नाम केसर कालमी था।

प्र:

पाबूजी के पिता का नाम क्या था?

1745 0

  • 1
    सूरजमल
    सही
    गलत
  • 2
    धांधल जी
    सही
    गलत
  • 3
    जयमल
    सही
    गलत
  • 4
    ताहड़जी
    सही
    गलत
  • उत्तर देखेंउत्तर छिपाएं
  • Workspace

उत्तर : 2. "धांधल जी"
व्याख्या :

1. पाबूजी का जन्म 1239 ईस्वी को कोलू (वर्तमान बाड़मेर, राजस्थान) में हुआ था। उनके पिता का नाम धांधल जी राठौड़ था। धांधल जी राठौड़ की चार संताने थी जिनमें से उनके दो पुत्र और दो पुत्रियां थी। उनके पुत्रों के नाम पाबूजी व बूरा थे तथा उनकी पुत्रियों के नाम सोना व पेमा था।

2. इतिहासकार मुहणौत नैणसी, महाकवि मोडजी आशिया व क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, पाबूजी राठौड़ का जन्म अप्सरा के गर्भ से हुआ था। उनके अनुसार पाबूजी का जन्म स्थान वर्तमान बाड़मेर शहर से 8 कोस आगे खारी खाबड़ के जूना नामक गांव था।

3. पाबूजी का पूजा स्थल कोलू (फलोदी) में है। यहां कोलू में ही प्रतिवर्ष उनका मेला भी भरता है। क्योंकि वे अपने विवाह के बीच में उठकर गायों को बचाने गए थे जिसकी वजह से उन्हें दूल्हे के वस्त्रों में दिखाया जाता है। उनका प्रतीक चिन्ह हाथ में भाला लिए अश्वारोही के रूप में प्रचलित है।

4. पाबूजी को ग्रामीण लोग लक्ष्मण जी का अवतार मानते हैं और लोकदेवता के रूप में पूजते हैं। जनमानस पाबूजी को ऊँटो के देवता के रूप में भी पूजती है। 

प्र:

राजस्थान में छप्पन्न का मैदान किस नदी के बेसिन में स्थित है?

1609 0

  • 1
    बनास
    सही
    गलत
  • 2
    चम्बल
    सही
    गलत
  • 3
    माही
    सही
    गलत
  • 4
    लूनी
    सही
    गलत
  • उत्तर देखेंउत्तर छिपाएं
  • Workspace

उत्तर : 3. "माही"

प्र:

राजस्थान में "छप्पन का मैदान" किस  नदी के बेसिन में स्थित है ? 

2015 1

  • 1
    लूनी
    सही
    गलत
  • 2
    माही
    सही
    गलत
  • 3
    चम्बल
    सही
    गलत
  • 4
    बनास
    सही
    गलत
  • उत्तर देखेंउत्तर छिपाएं
  • Workspace

उत्तर : 2. "माही"
व्याख्या :

1. मध्य माही बेसिन “छप्पन मैदान” से जुड़ा है। बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ के बीच, छप्पन मैदान के रूप में जाना जाने वाला एक क्षेत्र माही नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा बनता है। इसमें 56 गांव शामिल हैं। छप्पन क्षेत्र गहरा और जटिल रूप से कटा हुआ है जिसके परिणामस्वरूप अलग-अलग पहाड़ियों का निर्माण होता है, जो उत्तर में मेवाड़ के मैदान के समान नहीं है। यह गहरा विच्छेदित क्षेत्र स्थानीय रूप से ‘बागर’ के रूप में जाना जाता है और इसमें बांसवाड़ा और डूंगरपुर के पहाड़ी इलाके शामिल हैं।

2. राजस्थान के बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जिलों के दक्षिणी भाग में माही नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित मैदान को माही का मैदान कहा जाता है। इस मैदानी भाग में छप्पन ग्रामों का समूह तथा छप्पन नदी-नाले स्थित हैं, इसे छप्पन का मैदान कहते हैं।

छप्पन का मैदान की विशेषता

1. छप्पन का मैदान को मध्य माही का मैदान भी कहा जाता है।

2. यह मैदान बंजर भूमि की घाटियों का क्षेत्र है।

3. यह डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ तथा उदयपुर के कुछ भागों पर विस्तृत है और इसका प्रवाह अरब सागर की ओर भी है।

6. यह मैदान तीन भागों में विभाजित किया गया है, जैसे चम्बल बेसिन, बनास बेसिन और मध्य माही बेसिन।

7. प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा के बीच के भाग में छप्पन ग्राम समूह स्थित है इसलिए इस भू-भाग को छप्पन के मैदान से भी जाना जाता है।

प्र:

छप्पन का मैदान भाग है -

1185 0

  • 1
    माही बेसिन का
    सही
    गलत
  • 2
    बनास बेसिन का
    सही
    गलत
  • 3
    चम्बल बेसिन का
    सही
    गलत
  • 4
    लूनी बेसिन का
    सही
    गलत
  • उत्तर देखेंउत्तर छिपाएं
  • Workspace

उत्तर : 1. "माही बेसिन का"
व्याख्या :

1. मध्य माही बेसिन “छप्पन मैदान” से जुड़ा है। बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ के बीच, छप्पन मैदान के रूप में जाना जाने वाला एक क्षेत्र माही नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा बनता है। इसमें 56 गांव शामिल हैं। छप्पन क्षेत्र गहरा और जटिल रूप से कटा हुआ है जिसके परिणामस्वरूप अलग-अलग पहाड़ियों का निर्माण होता है, जो उत्तर में मेवाड़ के मैदान के समान नहीं है। यह गहरा विच्छेदित क्षेत्र स्थानीय रूप से ‘बागर’ के रूप में जाना जाता है और इसमें बांसवाड़ा और डूंगरपुर के पहाड़ी इलाके शामिल हैं।

2. राजस्थान के बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जिलों के दक्षिणी भाग में माही नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित मैदान को माही का मैदान कहा जाता है। इस मैदानी भाग में छप्पन ग्रामों का समूह तथा छप्पन नदी-नाले स्थित हैं, इसे छप्पन का मैदान कहते हैं।

छप्पन का मैदान की विशेषता

1. छप्पन का मैदान को मध्य माही का मैदान भी कहा जाता है।

2. यह मैदान बंजर भूमि की घाटियों का क्षेत्र है।

3. यह डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ तथा उदयपुर के कुछ भागों पर विस्तृत है और इसका प्रवाह अरब सागर की ओर भी है।

6. यह मैदान तीन भागों में विभाजित किया गया है, जैसे चम्बल बेसिन, बनास बेसिन और मध्य माही बेसिन।

7. प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा के बीच के भाग में छप्पन ग्राम समूह स्थित है इसलिए इस भू-भाग को छप्पन के मैदान से भी जाना जाता है।

      त्रुटि की रिपोर्ट करें

    कृपया संदेश दर्ज करें
    त्रुटि रिपोर्ट सफलतापूर्वक जमा हुई

      त्रुटि की रिपोर्ट करें

    कृपया संदेश दर्ज करें
    त्रुटि रिपोर्ट सफलतापूर्वक जमा हुई

      त्रुटि की रिपोर्ट करें

    कृपया संदेश दर्ज करें
    त्रुटि रिपोर्ट सफलतापूर्वक जमा हुई

      त्रुटि की रिपोर्ट करें

    कृपया संदेश दर्ज करें
    त्रुटि रिपोर्ट सफलतापूर्वक जमा हुई

      त्रुटि की रिपोर्ट करें

    कृपया संदेश दर्ज करें
    त्रुटि रिपोर्ट सफलतापूर्वक जमा हुई

      त्रुटि की रिपोर्ट करें

    कृपया संदेश दर्ज करें
    त्रुटि रिपोर्ट सफलतापूर्वक जमा हुई

      त्रुटि की रिपोर्ट करें

    कृपया संदेश दर्ज करें
    त्रुटि रिपोर्ट सफलतापूर्वक जमा हुई

      त्रुटि की रिपोर्ट करें

    कृपया संदेश दर्ज करें
    त्रुटि रिपोर्ट सफलतापूर्वक जमा हुई