General Hindi प्रश्न और उत्तर का अभ्यास करें

प्र:

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न उत्तर लिखिए :
भारतीय नारी त्याग, बलिदान, साहस, शक्ति तथा सेवा की सजीव मूर्ति है। जीवन में सुख - दुःख में छाया की भाँति पुरुष का साथ देने के कारण वह अर्द्धांगिनी, घर की व्यवस्थापिका होने के कारण वह लक्ष्मी और श्लाघनीय गुणों के कारण वह देवी कही जाती है। स्वार्थ और भोग - लिप्सा को तिलांजलि देकर भारतीय नारी ने आत्म बलिदान के द्वारा समय - समय पर ऐसी ज्योति प्रज्जवलित की है कि उसके पुनीत प्रकाश में पुरुष ने अपना मार्ग ढूँढ़ा है। उसकी शक्ति के आगे तो यमराज को भी हारना पड़ा नारी का सम्मान करके ही पुरुष का जीवन कुसुम सुवासित होता है । भारतीय संस्कृति के अनुसार जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं।

भोग - लिप्सा में कौन - सा समास है- 

1368 0

  • 1
    द्विगु समास
    सही
    गलत
  • 2
    कर्मधारय समास
    सही
    गलत
  • 3
    तत्पुरुष समास
    सही
    गलत
  • 4
    द्वन्द्व समास
    सही
    गलत
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  • Workspace

उत्तर : 3. "तत्पुरुष समास "

प्र:

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न उत्तर लिखिए :
भारतीय नारी त्याग, बलिदान, साहस, शक्ति तथा सेवा की सजीव मूर्ति है। जीवन में सुख - दुःख में छाया की भाँति पुरुष का साथ देने के कारण वह अर्द्धांगिनी, घर की व्यवस्थापिका होने के कारण वह लक्ष्मी और श्लाघनीय गुणों के कारण वह देवी कही जाती है। स्वार्थ और भोग - लिप्सा को तिलांजलि देकर भारतीय नारी ने आत्म बलिदान के द्वारा समय - समय पर ऐसी ज्योति प्रज्जवलित की है कि उसके पुनीत प्रकाश में पुरुष ने अपना मार्ग ढूँढ़ा है। उसकी शक्ति के आगे तो यमराज को भी हारना पड़ा नारी का सम्मान करके ही पुरुष का जीवन कुसुम सुवासित होता है । भारतीय संस्कृति के अनुसार जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं।

तिलांजलि शब्द का संधि - विच्छेद होगा- 

3221 0

  • 1
    तिल + अंजलि
    सही
    गलत
  • 2
    तिलां + जलि
    सही
    गलत
  • 3
    तिल + अंजनी
    सही
    गलत
  • 4
    तील + अंजली
    सही
    गलत
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उत्तर : 1. "तिल + अंजलि "

प्र:

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न उत्तर लिखिए :
भारतीय नारी त्याग, बलिदान, साहस, शक्ति तथा सेवा की सजीव मूर्ति है। जीवन में सुख - दुःख में छाया की भाँति पुरुष का साथ देने के कारण वह अर्द्धांगिनी, घर की व्यवस्थापिका होने के कारण वह लक्ष्मी और श्लाघनीय गुणों के कारण वह देवी कही जाती है। स्वार्थ और भोग - लिप्सा को तिलांजलि देकर भारतीय नारी ने आत्म बलिदान के द्वारा समय - समय पर ऐसी ज्योति प्रज्जवलित की है कि उसके पुनीत प्रकाश में पुरुष ने अपना मार्ग ढूँढ़ा है। उसकी शक्ति के आगे तो यमराज को भी हारना पड़ा नारी का सम्मान करके ही पुरुष का जीवन कुसुम सुवासित होता है । भारतीय संस्कृति के अनुसार जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं।

अर्द्धांगिनी शब्द का क्या अर्थ है? 

1220 0

  • 1
    सम्मान
    सही
    गलत
  • 2
    सहेली
    सही
    गलत
  • 3
    कुसुम
    सही
    गलत
  • 4
    पत्नी
    सही
    गलत
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उत्तर : 4. " पत्नी"

प्र:

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
जीवन के किसी भी क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष किया है और लक्ष्य प्राप्त किया है। ऐसा ही एक नाम है- सुधा चंद्रन पैर खराब होने के बावजूद वह चोटी की नृत्यांगना बनी। सुधा चंद्रन की माता श्रीमती धंगम एवं पिता श्री के. डी . चंद्रन की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी पुत्री राष्ट्रीय ख्याति की नृत्यांगना बने। इसीलिए चंद्रन दंपति ने सुधा को पाँच वर्ष की अल्पायु में ही मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय ' कला - सदन में प्रवेश दिलवाया। पहले पहल तो नृत्य विद्यालय के शिक्षकों ने इतनी छोटी उम्र की बच्ची के दाखिले में हिचकिचाहट महसूस की किंतु सुधा की प्रतिभा देखकर सुप्रसिद्ध नृत्य शिक्षक श्री के . एस. रामास्वामी भागवतार ने उसे शिष्या के रूप में स्वीकार कर लिया और सुधा उनसे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने लगी।

शिष्य शब्द का पर्यायवाची है? 

958 0

  • 1
    अनुगामी
    सही
    गलत
  • 2
    छात्र
    सही
    गलत
  • 3
    शागिर्द
    सही
    गलत
  • 4
    उपरोक्त सभी
    सही
    गलत
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  • Workspace

उत्तर : 4. "उपरोक्त सभी"

प्र:

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
जीवन के किसी भी क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष किया है और लक्ष्य प्राप्त किया है। ऐसा ही एक नाम है- सुधा चंद्रन पैर खराब होने के बावजूद वह चोटी की नृत्यांगना बनी। सुधा चंद्रन की माता श्रीमती धंगम एवं पिता श्री के. डी . चंद्रन की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी पुत्री राष्ट्रीय ख्याति की नृत्यांगना बने। इसीलिए चंद्रन दंपति ने सुधा को पाँच वर्ष की अल्पायु में ही मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय ' कला - सदन में प्रवेश दिलवाया। पहले पहल तो नृत्य विद्यालय के शिक्षकों ने इतनी छोटी उम्र की बच्ची के दाखिले में हिचकिचाहट महसूस की किंतु सुधा की प्रतिभा देखकर सुप्रसिद्ध नृत्य शिक्षक श्री के . एस. रामास्वामी भागवतार ने उसे शिष्या के रूप में स्वीकार कर लिया और सुधा उनसे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने लगी।

विद्यालय  की सन्धि क्या है?

917 0

  • 1
    विद्या + आलय
    सही
    गलत
  • 2
    विद्य + आलय
    सही
    गलत
  • 3
    विद्या + अलय
    सही
    गलत
  • 4
    विद्या + आलया
    सही
    गलत
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  • Workspace

उत्तर : 1. "विद्या + आलय"

प्र:

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
जीवन के किसी भी क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष किया है और लक्ष्य प्राप्त किया है। ऐसा ही एक नाम है- सुधा चंद्रन पैर खराब होने के बावजूद वह चोटी की नृत्यांगना बनी। सुधा चंद्रन की माता श्रीमती धंगम एवं पिता श्री के. डी . चंद्रन की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी पुत्री राष्ट्रीय ख्याति की नृत्यांगना बने। इसीलिए चंद्रन दंपति ने सुधा को पाँच वर्ष की अल्पायु में ही मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय ' कला - सदन में प्रवेश दिलवाया। पहले पहल तो नृत्य विद्यालय के शिक्षकों ने इतनी छोटी उम्र की बच्ची के दाखिले में हिचकिचाहट महसूस की किंतु सुधा की प्रतिभा देखकर सुप्रसिद्ध नृत्य शिक्षक श्री के . एस. रामास्वामी भागवतार ने उसे शिष्या के रूप में स्वीकार कर लिया और सुधा उनसे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने लगी।

निम्न में से कौन सा शब्द शुद्ध है?

932 0

  • 1
    श्रीमती
    सही
    गलत
  • 2
    बावजुद
    सही
    गलत
  • 3
    हिचकिआहट
    सही
    गलत
  • 4
    उपरोक्त सभी
    सही
    गलत
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  • Workspace

उत्तर : 1. "श्रीमती"

प्र:

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
जीवन के किसी भी क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष किया है और लक्ष्य प्राप्त किया है। ऐसा ही एक नाम है- सुधा चंद्रन पैर खराब होने के बावजूद वह चोटी की नृत्यांगना बनी। सुधा चंद्रन की माता श्रीमती धंगम एवं पिता श्री के. डी . चंद्रन की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी पुत्री राष्ट्रीय ख्याति की नृत्यांगना बने। इसीलिए चंद्रन दंपति ने सुधा को पाँच वर्ष की अल्पायु में ही मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय ' कला - सदन में प्रवेश दिलवाया। पहले पहल तो नृत्य विद्यालय के शिक्षकों ने इतनी छोटी उम्र की बच्ची के दाखिले में हिचकिचाहट महसूस की किंतु सुधा की प्रतिभा देखकर सुप्रसिद्ध नृत्य शिक्षक श्री के . एस. रामास्वामी भागवतार ने उसे शिष्या के रूप में स्वीकार कर लिया और सुधा उनसे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने लगी।

हिचकिचाहट में कौन सा प्रत्यय लगा है? 

1117 0

  • 1
    चाहट
    सही
    गलत
  • 2
    हट
    सही
    गलत
  • 3
    किचाहट
    सही
    गलत
  • 4
    आहट
    सही
    गलत
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  • Workspace

उत्तर : 4. "आहट "

प्र:

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
जीवन के किसी भी क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष किया है और लक्ष्य प्राप्त किया है। ऐसा ही एक नाम है- सुधा चंद्रन पैर खराब होने के बावजूद वह चोटी की नृत्यांगना बनी। सुधा चंद्रन की माता श्रीमती धंगम एवं पिता श्री के. डी . चंद्रन की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी पुत्री राष्ट्रीय ख्याति की नृत्यांगना बने। इसीलिए चंद्रन दंपति ने सुधा को पाँच वर्ष की अल्पायु में ही मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय ' कला - सदन में प्रवेश दिलवाया। पहले पहल तो नृत्य विद्यालय के शिक्षकों ने इतनी छोटी उम्र की बच्ची के दाखिले में हिचकिचाहट महसूस की किंतु सुधा की प्रतिभा देखकर सुप्रसिद्ध नृत्य शिक्षक श्री के . एस. रामास्वामी भागवतार ने उसे शिष्या के रूप में स्वीकार कर लिया और सुधा उनसे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने लगी।

प्रशिक्षण शब्द में कौन सा उपसर्ग है? 

1016 0

  • 1
    प्रा
    सही
    गलत
  • 2
    प्रति
    सही
    गलत
  • 3
    प्र
    सही
    गलत
  • 4
    प्रशि
    सही
    गलत
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उत्तर : 3. "प्र "

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