General Hindi प्रश्न और उत्तर का अभ्यास करें
8 प्र: निम्नलिखित में गलत कथन है:
939 063ad5fbed57135058114de37
63ad5fbed57135058114de37- 1सामान्य वाक्य के अंत में पूर्ण विराम का प्रयोग किया जाता है।false
- 2मनोविकार सूचित करने में यदि प्रश्नवाचक शब्द आवे तो वाक्य के अंत में प्रश्नसूचक चिह्न लगाया जाता है।true
- 3किसी रचनाकार के उपनाम और रचना के साथ इकहरा अवतरण चिह्न लगाया जाता है ।false
- 4यदि एक ही वाक्य में कई प्रश्नसूचक उपवाक्य हों तो पूरे वाक्य की समाप्ति पर ही प्रश्नसूचक चिह्न लगाया जाता है।false
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उत्तर : 2. "मनोविकार सूचित करने में यदि प्रश्नवाचक शब्द आवे तो वाक्य के अंत में प्रश्नसूचक चिह्न लगाया जाता है।"
प्र: ' पाखंडी व्यक्ति' के लिए उपयुक्त मुहावरा है-
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6241d930b229b02fa7a699df- 1बछिया के ताऊfalse
- 2बगुला भगतtrue
- 3पैंतरेबाजfalse
- 4माई का लालfalse
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उत्तर : 2. "बगुला भगत "
प्र: कौन सा शब्द तद्भव नहीं है?
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6283a05d3f7a1029b933e8a3- 1भंडारfalse
- 2कुक्कुरtrue
- 3घरfalse
- 4कंगनfalse
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उत्तर : 2. "कुक्कुर "
प्र: निम्नलिखित में से अयादि संधि के लिए कौनसा कथन सत्य है?
937 06365092121454e014d901e59
6365092121454e014d901e59- 1नौ + इक = नाविकfalse
- 2सदा + एव = सदैवtrue
- 3पौ + अक = पावकfalse
- 4चे + अन = चयनfalse
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उत्तर : 2. "सदा + एव = सदैव"
प्र:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
आचार्य द्रोण महर्षि भरद्वाज के पुत्र थे। पांचाल - नरेश का पुत्र द्रुपद भी द्रोण के साथ ही भरद्वाज - आश्रम में शिक्षा पा रहा था। दोनों में गहरी मित्रता थी। कभी - कभी राजकुमार द्रुपद उत्साह में आकर दोण से यहाँ तक कह देता था कि पांचाल देश का राजा बन जाने पर मैं आधा राज्य तुम्हें दे दूँगा। शक्षा समाप्त होने पर द्रोणाचार्य ने कृपाचार्य की बहन से ब्याह कर लिया। उससे उनके एक पुत्र हुआ, जिसका नाम उन्होंने अश्वत्थामा रखा । द्रोण अपनी पत्नी और पुत्र को बड़ा प्रेम करते थे। द्रोण बड़े गरीब थे। वह चाहते थे कि धन गप्त किया जाए और अपनी पत्नी व पुत्र के साथ सुख से रहा जाए । उन्हें खबर लगी कि परशुराम अपनी सारी संपत्ति गरीब ब्राह्मणों को बाँट रहे हैं , तो भागे - भागे उनके पास गए , लेकिन उनके नहुँचने तक परशुराम अपनी सारी संपत्ति वितरित कर चुके थे और वन - गमन की तैयारी कर रहे थे । दोण को देखकर वह बोले- " ब्राह्मण श्रेष्ठ ! आपका स्वागत है। पर मेरे पास जो कुछ था , वह मैं बाँट चुका हूँ । अब यह मेरा शरीर और धनुर्विद्या ही है। बताइए, मैं आपके लिए क्या करूँ? "
महर्षि की सन्धि क्या है?
937 06231e561de069f6e1b884a63
6231e561de069f6e1b884a63आचार्य द्रोण महर्षि भरद्वाज के पुत्र थे। पांचाल - नरेश का पुत्र द्रुपद भी द्रोण के साथ ही भरद्वाज - आश्रम में शिक्षा पा रहा था। दोनों में गहरी मित्रता थी। कभी - कभी राजकुमार द्रुपद उत्साह में आकर दोण से यहाँ तक कह देता था कि पांचाल देश का राजा बन जाने पर मैं आधा राज्य तुम्हें दे दूँगा। शक्षा समाप्त होने पर द्रोणाचार्य ने कृपाचार्य की बहन से ब्याह कर लिया। उससे उनके एक पुत्र हुआ, जिसका नाम उन्होंने अश्वत्थामा रखा । द्रोण अपनी पत्नी और पुत्र को बड़ा प्रेम करते थे। द्रोण बड़े गरीब थे। वह चाहते थे कि धन गप्त किया जाए और अपनी पत्नी व पुत्र के साथ सुख से रहा जाए । उन्हें खबर लगी कि परशुराम अपनी सारी संपत्ति गरीब ब्राह्मणों को बाँट रहे हैं , तो भागे - भागे उनके पास गए , लेकिन उनके नहुँचने तक परशुराम अपनी सारी संपत्ति वितरित कर चुके थे और वन - गमन की तैयारी कर रहे थे । दोण को देखकर वह बोले- " ब्राह्मण श्रेष्ठ ! आपका स्वागत है। पर मेरे पास जो कुछ था , वह मैं बाँट चुका हूँ । अब यह मेरा शरीर और धनुर्विद्या ही है। बताइए, मैं आपके लिए क्या करूँ? "
- 1महा + ऋषिtrue
- 2मह + ऋषिfalse
- 3महा + षिfalse
- 4इनमे से कोइ नहींfalse
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उत्तर : 1. "महा + ऋषि"
प्र: निम्नलिखित में से संज्ञा शब्द से बना विशेषण छाँटिए –
936 0632da9df31300b7ce47a60ca
632da9df31300b7ce47a60ca- 1दुखीtrue
- 2बिकाऊfalse
- 3भुलक्कड़false
- 4हमाराfalse
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उत्तर : 1. "दुखी"
प्र: 'कुपात्र' में कौनसा उपसर्ग है?
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63456f0b3a01e50b27071964- 1कfalse
- 2कूfalse
- 3कुtrue
- 4कुस्false
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उत्तर : 3. "कु"
प्र:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
जीवन के किसी भी क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष किया है और लक्ष्य प्राप्त किया है। ऐसा ही एक नाम है- सुधा चंद्रन पैर खराब होने के बावजूद वह चोटी की नृत्यांगना बनी। सुधा चंद्रन की माता श्रीमती धंगम एवं पिता श्री के. डी . चंद्रन की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी पुत्री राष्ट्रीय ख्याति की नृत्यांगना बने। इसीलिए चंद्रन दंपति ने सुधा को पाँच वर्ष की अल्पायु में ही मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय ' कला - सदन में प्रवेश दिलवाया। पहले पहल तो नृत्य विद्यालय के शिक्षकों ने इतनी छोटी उम्र की बच्ची के दाखिले में हिचकिचाहट महसूस की किंतु सुधा की प्रतिभा देखकर सुप्रसिद्ध नृत्य शिक्षक श्री के . एस. रामास्वामी भागवतार ने उसे शिष्या के रूप में स्वीकार कर लिया और सुधा उनसे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने लगी।
निम्न में से कौन सा शब्द शुद्ध है?
935 062382636cd09f46e2f20ed4c
62382636cd09f46e2f20ed4cजीवन के किसी भी क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष किया है और लक्ष्य प्राप्त किया है। ऐसा ही एक नाम है- सुधा चंद्रन पैर खराब होने के बावजूद वह चोटी की नृत्यांगना बनी। सुधा चंद्रन की माता श्रीमती धंगम एवं पिता श्री के. डी . चंद्रन की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी पुत्री राष्ट्रीय ख्याति की नृत्यांगना बने। इसीलिए चंद्रन दंपति ने सुधा को पाँच वर्ष की अल्पायु में ही मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय ' कला - सदन में प्रवेश दिलवाया। पहले पहल तो नृत्य विद्यालय के शिक्षकों ने इतनी छोटी उम्र की बच्ची के दाखिले में हिचकिचाहट महसूस की किंतु सुधा की प्रतिभा देखकर सुप्रसिद्ध नृत्य शिक्षक श्री के . एस. रामास्वामी भागवतार ने उसे शिष्या के रूप में स्वीकार कर लिया और सुधा उनसे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने लगी।
- 1श्रीमतीtrue
- 2बावजुदfalse
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