Rajasthan GK Practice Question and Answer

Q:

'खेजड़ी वृक्ष' राजस्थान के किस लोक देवता का प्रतीक है?

2435 0

  • 1
    तेजाजी
    Correct
    Wrong
  • 2
    रामदेवजी
    Correct
    Wrong
  • 3
    गोगाजी
    Correct
    Wrong
  • 4
    पाबूजी
    Correct
    Wrong
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  • Workspace

Answer : 3. "गोगाजी "
Explanation :

1. राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी है। यह वृक्ष राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग दो-तिहाई हिस्से में पाया जाता है और सांस्कृतिक तथा आर्थिक रूप से बहुत महत्व रखता है।

2. खेजड़ी का वैज्ञानिक नाम प्रोसोपिस सिनेरिया है। यह एक सूखा-सहिष्णु वृक्ष है जो कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी जीवित रह सकता है। यह वृक्ष मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाया जाता है और राजस्थान के थार मरुस्थल में यह बहुतायत में पाया जाता है।

3. खेजड़ी वृक्ष को राजस्थान में गोगाजी लोक देवता का प्रतीक मानते है।

Q:

राजस्थान में खैर वनीय क्षेत्र पाए जाते हैं - 

2434 0

  • 1
    बीकानेर - बाड़मेर
    Correct
    Wrong
  • 2
    कोटा - सवाई माधोपुर
    Correct
    Wrong
  • 3
    जालौर - सिरोही
    Correct
    Wrong
  • 4
    अजमेर - भीलवाड़ा
    Correct
    Wrong
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Answer : 2. "कोटा - सवाई माधोपुर "
Explanation :

राजस्थान में खैर वनीय क्षेत्र कोटा - सवाई माधोपुर में पाए जाते हैं।


Q:

उदयपुर में राजस्थान महिला परिषद् की संस्थापक कौन थी?

2423 0

  • 1
    शांता त्रिवेदी
    Correct
    Wrong
  • 2
    कृष्णा व्यास
    Correct
    Wrong
  • 3
    लक्ष्मीदेवी काबरा
    Correct
    Wrong
  • 4
    कमला स्वाधीन
    Correct
    Wrong
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  • Workspace

Answer : 1. "शांता त्रिवेदी"

Q:

राजपूतों को हूणों की सन्तान बताया हैं?

2420 0

  • 1
    कर्नल जेम्स टॉड़
    Correct
    Wrong
  • 2
    वी.ए. स्मिथ
    Correct
    Wrong
  • 3
    डॉ. भण्डारकर
    Correct
    Wrong
  • 4
    डॉ. दशरथ शर्मा
    Correct
    Wrong
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Answer : 2. " वी.ए. स्मिथ"

Q:

निम्नलिखित में से कौनसी पुस्तक चौहानों के इतिहास बारे में जानकारी का स्रोत नहीं है?

2412 0

  • 1
    सुर्जन चरित्र
    Correct
    Wrong
  • 2
    हम्मीर महाकाव्य
    Correct
    Wrong
  • 3
    पृथ्वीराज विजय
    Correct
    Wrong
  • 4
    हर्ष चरित
    Correct
    Wrong
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Answer : 4. "हर्ष चरित"

Q:

जरगा से रागा पहाड़ियों के मध्य सदैव हरा भरा क्षेत्र कहलाता है?

2411 0

  • 1
    गिरवा
    Correct
    Wrong
  • 2
    देशहरो
    Correct
    Wrong
  • 3
    मेवल
    Correct
    Wrong
  • 4
    भैंसरोडगढ़
    Correct
    Wrong
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  • Workspace

Answer : 2. " देशहरो "
Explanation :

1. गिरवा : उदयपुर में चारों ओर पहाड़ीयाँ होने के कारण उदयपुर की आकृति एक तश्तरीनुमा बेसिन जैसी है जिसे स्थानीय भाषा में गिरवा कहते है।

2. देशहरो: उदयपुर में जरगा (उदयपुर) व रागा (सिरोही) पहाड़ीयों के बीच का क्षेत्र सदा हरा भरा रहने के कारण देशहरो कहलाता है।

3. देवल/ मेवल : डुंगरपुर व बांसवाड़ा के मध्य का भाग।

4. भैंसरोड़गढ़ किला : भैंसरोड़गढ़ किला या भैंसरोड़ किला एक प्राचीन किला है जो भारत के राजस्थान राज्य में एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है।

Q:

गुर्जर जाति के लोग श्री देवनारायण का अवतार मानते हैं?

2409 0

  • 1
    श्रीराम
    Correct
    Wrong
  • 2
    श्री कृष्ण
    Correct
    Wrong
  • 3
    विष्णु
    Correct
    Wrong
  • 4
    तल्लीनाथ
    Correct
    Wrong
  • Show AnswerHide Answer
  • Workspace

Answer : 3. "विष्णु"
Explanation :

1. भगवान विष्णु का अवतार कहे जाने वाले गुर्जर जाति के आराध्य देव भगवान श्री देवनारायण जी का जन्म विक्रम संवत 968 माघ शुक्ल की सप्तमी के दिन मालासेरी में हुआ था, इनके पिताजी का नाम सवाई भोज एवं माँ का नाम साढू था, इस कारण इन्हें साढू माता का लाल भी कहा जाता हैं।

2. बचपन में देवजी का नाम उदय सिंह था, इनका विवाह राजकुमारी पीपल दे एवं दो अन्य रानियों नाग कन्या और दैत्य कन्या के साथ हुआ था. इनके एक बेटा बीला जो बाद में प्रथम पुजारी भी बने तथा बेटी का नाम बीली था।

Q:

पाबूजी के पिता का नाम क्या था?

2406 0

  • 1
    सूरजमल
    Correct
    Wrong
  • 2
    धांधल जी
    Correct
    Wrong
  • 3
    जयमल
    Correct
    Wrong
  • 4
    ताहड़जी
    Correct
    Wrong
  • Show AnswerHide Answer
  • Workspace

Answer : 2. "धांधल जी"
Explanation :

1. पाबूजी का जन्म 1239 ईस्वी को कोलू (वर्तमान बाड़मेर, राजस्थान) में हुआ था। उनके पिता का नाम धांधल जी राठौड़ था। धांधल जी राठौड़ की चार संताने थी जिनमें से उनके दो पुत्र और दो पुत्रियां थी। उनके पुत्रों के नाम पाबूजी व बूरा थे तथा उनकी पुत्रियों के नाम सोना व पेमा था।

2. इतिहासकार मुहणौत नैणसी, महाकवि मोडजी आशिया व क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, पाबूजी राठौड़ का जन्म अप्सरा के गर्भ से हुआ था। उनके अनुसार पाबूजी का जन्म स्थान वर्तमान बाड़मेर शहर से 8 कोस आगे खारी खाबड़ के जूना नामक गांव था।

3. पाबूजी का पूजा स्थल कोलू (फलोदी) में है। यहां कोलू में ही प्रतिवर्ष उनका मेला भी भरता है। क्योंकि वे अपने विवाह के बीच में उठकर गायों को बचाने गए थे जिसकी वजह से उन्हें दूल्हे के वस्त्रों में दिखाया जाता है। उनका प्रतीक चिन्ह हाथ में भाला लिए अश्वारोही के रूप में प्रचलित है।

4. पाबूजी को ग्रामीण लोग लक्ष्मण जी का अवतार मानते हैं और लोकदेवता के रूप में पूजते हैं। जनमानस पाबूजी को ऊँटो के देवता के रूप में भी पूजती है। 

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