General Hindi Question and Answer Practice Question and Answer

Q:

इनमें से किस शब्द में ‘परा’ उपसर्ग है -

750 0

  • 1
    परामर्श
    Correct
    Wrong
  • 2
    परायण
    Correct
    Wrong
  • 3
    पराधीन
    Correct
    Wrong
  • 4
    परार्ध
    Correct
    Wrong
  • Show AnswerHide Answer
  • Workspace

Answer : 1. "परामर्श"

Q:

निम्नलिखित में से कौनसा वाक्य कर्तृवाच्य नहीं है?

748 0

  • 1
    प्रेमचंद ने गोदान लिखा।
    Correct
    Wrong
  • 2
    कैदी रिहा कर दिये जायें।
    Correct
    Wrong
  • 3
    ट्रक ने सारा सामान पहुँचा दिया।
    Correct
    Wrong
  • 4
    राधा लिख नहीं पाती।
    Correct
    Wrong
  • Show AnswerHide Answer
  • Workspace

Answer : 2. "कैदी रिहा कर दिये जायें। "

Q:

किस विकल्प में सभी अशुद्ध शब्द हैं?

748 0

  • 1
    सूजबूझ, अंधाधुंद
    Correct
    Wrong
  • 2
    साठगाँठ, आपाधापी
    Correct
    Wrong
  • 3
    ऐहसानमंद, खरीदार
    Correct
    Wrong
  • 4
    कशमकश, काबिलीयत
    Correct
    Wrong
  • Show AnswerHide Answer
  • Workspace

Answer : 1. "सूजबूझ, अंधाधुंद"

Q:

निम्नलिखित में किस विकल्प में अशुद्ध वाक्य है?

748 0

  • 1
    सविता ने आज एक सोने का हार खरीदा।
    Correct
    Wrong
  • 2
    दादू वाणी की हस्तलिखित प्रति उपलब्ध है।
    Correct
    Wrong
  • 3
    यहाँ सभी प्रकार की दवाइयाँ मिलती हैं।
    Correct
    Wrong
  • 4
    शिवाजी ने शत्रु - सेना को नाकों चने चबवाये।
    Correct
    Wrong
  • Show AnswerHide Answer
  • Workspace

Answer : 1. "सविता ने आज एक सोने का हार खरीदा।"

Q:

निम्नलिखित में से कर्तृवाच्य है –

745 0

  • 1
    मैं प्रतिदिन खेलता हूँ।
    Correct
    Wrong
  • 2
    बालक से पढ़ा नहीं जाता।
    Correct
    Wrong
  • 3
    लड़की द्वारा पत्र लिखा जाता है।
    Correct
    Wrong
  • 4
    संगीता से पत्र लिखा जाता है।
    Correct
    Wrong
  • Show AnswerHide Answer
  • Workspace

Answer : 1. "मैं प्रतिदिन खेलता हूँ।"

Q:

 ( प्रश्न 5-10) निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनिए-

              भारतीय संस्कृति में आप - ज्ञान सर्वोच्च है। इस ज्ञान का प्रादुर्भाव सृष्टि के आरम्भ में हुआ। ऋषिगण रज और तम के स्पर्श से रहित थे। अतः उनकी बुद्धि देश और काल की सीमाओं से परे का ज्ञान भी स्वायत्त करती थी। वे थे भी दीर्घायु। फलत : जिस प्रकार पार्वत्य निर्झर की वारिधारा अपने उद्गम स्थान में पवित्र और निर्मल होती है, उसी प्रकार यह असाधारण बहुविध ज्ञान स्वच्छ और शुभ्र था । आज का मानव रज और तम से अभिभूत है| वह अधिक से अधिक शतवर्ष जीवी है। उसका भोजन इतना शुद्ध नहीं। संसार का वायुमण्डल भी स्वार्थ, धोखा, असत्य भाषण और मारकाट के कलुषित भावों से ओत - प्रोत है। अतः वर्तमान मानव का बुद्धि स्तर बहुत उच्च नहीं। इतिहास इसका साक्ष्य। इस अवस्था में युग - युग में मानव का विकास हुआ या हास , यह प्रश्न गम्भीर विचार योग्य है। इस सिद्धान्त पर पाश्चात्य ज्ञान और आर्ष - ज्ञान की टक्कर अवश्यम्भावी है।

'इतिहास इसका साक्ष्य है। ' इस वाक्य में कौन - सा काल है? 

745 0

  • 1
    भूतकाल
    Correct
    Wrong
  • 2
    वर्तमान काल
    Correct
    Wrong
  • 3
    भविष्यत् काल
    Correct
    Wrong
  • 4
    इनमे से कोई नहीं
    Correct
    Wrong
  • Show AnswerHide Answer
  • Workspace

Answer : 2. "वर्तमान काल "

Q:

निम्नलिखित में से अशुद्ध वाक्य छाँटिए – 

745 0

  • 1
    सभा में सभी वर्ग के लोग थे।
    Correct
    Wrong
  • 2
    भारत में कई जातियों के लोग रहते हैं।
    Correct
    Wrong
  • 3
    इस कक्षा में सबसे अच्छा छात्र कौन है?
    Correct
    Wrong
  • 4
    तुम अपनी किताबें ले आओ।
    Correct
    Wrong
  • Show AnswerHide Answer
  • Workspace

Answer : 1. "सभा में सभी वर्ग के लोग थे।"

Q:

'चन्द्रमा' का सही पर्यायवाची है-

742 0

  • 1
    विधु
    Correct
    Wrong
  • 2
    पद्माकर
    Correct
    Wrong
  • 3
    मधवा
    Correct
    Wrong
  • 4
    सुरपति
    Correct
    Wrong
  • Show AnswerHide Answer
  • Workspace

Answer : 1. "विधु"

      Report Error

    Please Enter Message
    Error Reported Successfully

      Report Error

    Please Enter Message
    Error Reported Successfully

      Report Error

    Please Enter Message
    Error Reported Successfully

      Report Error

    Please Enter Message
    Error Reported Successfully

      Report Error

    Please Enter Message
    Error Reported Successfully

      Report Error

    Please Enter Message
    Error Reported Successfully

      Report Error

    Please Enter Message
    Error Reported Successfully

      Report Error

    Please Enter Message
    Error Reported Successfully