Rajasthan Art and Culture Practice Question and Answer
8 Q: मेवाड़ क्षेत्र में प्रसिद्ध गैर लोक नृत्य के अवसर पर किया जाता है।
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62e14979e50b894c6f59db51- 1बच्चे का जन्मfalse
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Answer : 2. "होली"
Q: रामस्नेही सम्प्रदाय की रैण शाखा के प्रवर्तक थे
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62e796d9ceafbe581b6997e6- 1संत रामचरण जीfalse
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Answer : 2. "संत दरियाव जी"
Q: 'मांदल' किससे सम्बन्धित है?
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62b058d1fbadac125c625d79- 1बरसात के बादलfalse
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Answer : 3. "वाद्ययंत्र "
Explanation :
मांदल’ एक वाद्ययंत्र है| यह एक भारतीय सितार है, जिसे आजकल मुखर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
Q: मुँह के द्वारा बजाए जाने वाले वाद्य यंत्रों में निम्नलिखित में से कौन सा नहीं है?
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624b2c43badeb679cfffb01c- 1अलगोजाfalse
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Answer : 4. " रवाज़ "
Q: चित्रकला शैली ‘बणी-ठणी’ सम्बंधित है
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626a633b175f3a35dcc5060e- 1सतवन्त प्रसादfalse
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Answer : 2. "नागरीदास"
Q: भारतीय लोक कला मण्डल संस्थान कहां स्थित है?
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63ff77ffb0030e718daeb70c- 1उदयपुरtrue
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Answer : 1. "उदयपुर"
Q: राजस्थान की बहुरूपिया कला को प्रसिद्धि दिलाने का श्रेय किसे जाता है?
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6315dbedd9ac741324cd7be9- 1देवीलाल सामरfalse
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Answer : 2. "जानकीलाल भांड"
Explanation :
1. जानकी लाल ने राजस्थान की 'बहुरूपिया कला' का प्रदर्शन किया।
2. बहुरूपिया जनजाति के लोगों ने पारंपरिक रूप से सड़क पर प्रदर्शन को अपने मुख्य व्यवसाय के रूप में किया है, प्रतिरूपण की कला का उपयोग करते हुए, अपने शरीर को अपनी पहचान बनाने के लिए चित्रित किया है।
3. हालाँकि, शहरी भारत में मनोरंजन के नए साधनों के साथ, यह कला रूप विलुप्त होने का सामना कर रहा है।
Q: किस लोक कला के निर्माण का पुश्तैनी व्यवसाय केवल चित्तौड़गढ़ जिले के ग्राम बस्सी में ही देखा जाता है?
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63875b5353e4f6617732b063- 1फड़false
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Answer : 4. "कावड़"
Explanation :
कावड़ लोक कला के निर्माण का पुश्तैनी व्यवसाय केवल चित्तौड़गढ़ जिले के ग्राम बस्सी में ही देखा जाता है। कावड़ एक मंदिरनुमा काष्ठकलाकृति है, जिसमें कई द्वार बने होते हैं। सभी द्वारों या कपाटों पर चित्र अंकित रहते हैं। कावड़ लाल रंग से रंगी जाती है व उसके ऊपर फिर काले रंग से पौराणिक कथाओं का चित्रांकन किया जाता है। इनमें महाभारत, रामायण, कृष्ण लीला के विभिन्न चरित्रों व घटनाओं का विवरण होता है। कावड़ जनजीवन की धार्मिक आस्थाओं और विश्वासों से जुड़ी है इसीलिए इसका वाचन-श्रवण कर लोग श्रद्धाभिभूत हो जाते हैं और मनमाना दान करते हैं।

