Rajasthan Geography प्रश्न और उत्तर का अभ्यास करें
8 प्र: भगत भील आंदोलन के लिए कौन सा पठार प्रसिद्ध है ?
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61d550ede7cc0851e098b8c0- 1मेसा का पठार पठारfalse
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उत्तर : 2. "भोमट पठार "
व्याख्या :
1. भगत आंदोलन राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में फैला हुआ भोमट पठार पर हुआ था।
2. यह आंदोलन मुख्य रूप से भील जनजाति के किसानों द्वारा शुरू किया गया था।
3. सरजी भगत और गोविंद गुरु ने मिलकर शुरू किया था।
- सन् 1883 ई. में गोविंद गिरी ने सम्प सभा की स्थापना की, जिसका प्रथम अधिवेशन 1903 ई . में मानगढ़ की पहाड़ियों पर हुआ।
-1913 में, मानगढ़ की पहाड़ी पर एक सभा से घिरी अश्विन शुक्ल पूर्णिमा पर मेवाड़ भील वाहिनी ने गोलियां चलाईं , जिसमें 1500 से अधिक भील मारे गए।
- मेवाड़ भील कोर की स्थापना 1841 ई. में खैरवाड़ा में हुई थी।
4. यहां आज भी अश्विन शुक्ल पूर्णिमा मेला लगता है।
प्र: हाड़ौती के पठार की औसत ऊँचाई है ?
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उत्तर : 4. "500 मी."
व्याख्या :
1. राजस्थान का दक्षिणी-पूर्वी भाग एक पठारी भाग है, जिसे 'दक्षिणी-पूर्वी पठार एवं हाडौती के पठार' के नाम से जाना जाता है। यह मालवा के पठार का विस्तार है |
2. इस क्षेत्र की औसत ऊँचाई 500 मीटर है तथा यहाँ अर्द्ध-चन्द्राकार रूप में पर्वत श्रेणियों का विस्तार है जो क्रमशः बूंदी और मुकुन्दवाड़ा की पहाड़ियों के नाम से जानी जाती है। यहाँ चम्बल नदी और इसकी प्रमुख सहायक कालीसिंह, परवन और पार्वती नदियाँ प्रवाहित है, उनके द्वारा निर्मित मैदानी प्रदेश कृषि के लिये उपयुक्त है।
3. दक्षिणी - पूर्वी पठार प्रदेश (हाडौती के पठार) प्रमुख विशेषता -
- इस क्षेत्र में राज्य की 11 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।
- दक्षिण पूर्वी पठारी प्रदेश राज्य के कुल क्षेत्रफल का 9.6 प्रतिशत है।
- इसका विस्तार भीलवाड़ा, फोटो, बूंदी, झालावाड़ और बारां जिलों में है।
- यह पठारी भाग अरावली और विंध्याचल पर्वत के बीच संक्रान्ति प्रदेश है।
- इस प्रदेश में लावा मिश्रित शैल एवं विन्ध्य शैलों का सम्मिश्रण है।
प्र: राजस्थान के कौन-से जिले में 2015-16 में मक्का की सर्वाधिक उत्पादकता (कि.ग्रा/हैक्ट.) रही?
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उत्तर : 4. "बून्दी "
प्र: कौनसा
बेसिन पूर्वी बेसिन मैदान का
भाग नहीं है?
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61b9b6dc34599837616c2958- 1चम्बल बेसिनfalse
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उत्तर : 2. "लूनी बेसिन"
प्र: छप्पन का मैदान भाग है -
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उत्तर : 1. "माही बेसिन का"
व्याख्या :
1. मध्य माही बेसिन “छप्पन मैदान” से जुड़ा है। बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ के बीच, छप्पन मैदान के रूप में जाना जाने वाला एक क्षेत्र माही नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा बनता है। इसमें 56 गांव शामिल हैं। छप्पन क्षेत्र गहरा और जटिल रूप से कटा हुआ है जिसके परिणामस्वरूप अलग-अलग पहाड़ियों का निर्माण होता है, जो उत्तर में मेवाड़ के मैदान के समान नहीं है। यह गहरा विच्छेदित क्षेत्र स्थानीय रूप से ‘बागर’ के रूप में जाना जाता है और इसमें बांसवाड़ा और डूंगरपुर के पहाड़ी इलाके शामिल हैं।
2. राजस्थान के बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जिलों के दक्षिणी भाग में माही नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित मैदान को माही का मैदान कहा जाता है। इस मैदानी भाग में छप्पन ग्रामों का समूह तथा छप्पन नदी-नाले स्थित हैं, इसे छप्पन का मैदान कहते हैं।
छप्पन का मैदान की विशेषता
1. छप्पन का मैदान को मध्य माही का मैदान भी कहा जाता है।
2. यह मैदान बंजर भूमि की घाटियों का क्षेत्र है।
3. यह डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ तथा उदयपुर के कुछ भागों पर विस्तृत है और इसका प्रवाह अरब सागर की ओर भी है।
6. यह मैदान तीन भागों में विभाजित किया गया है, जैसे चम्बल बेसिन, बनास बेसिन और मध्य माही बेसिन।
7. प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा के बीच के भाग में छप्पन ग्राम समूह स्थित है इसलिए इस भू-भाग को छप्पन के मैदान से भी जाना जाता है।
प्र: निम्न में से कौनसा युग्म असंगत है ?
कस्बे / नगर नदी
( a ) मांगरोल बाणगंगा
( b ) सांगोद सोम
( c ) पचपहाड़ पीपलाज
( d ) केशोरायपाटन चम्बल
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उत्तर : 2. "B"
प्र: राजस्थान के थार मरुस्थल की परम्परागत जल संग्रहण तकनीक है -
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6329f46e751e5310a5bc73e9- 1टांकाtrue
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उत्तर : 1. "टांका"
व्याख्या :
1. खडीन-यह एक मिट्टी का बना हुआ अस्थायी तालाब होता है, इसे किसी ढाल वाली भूमि के नीचे बनाते हैं । इसके दोनों ओर मिट्टी की दीवार (धोरा) तथा तीसरी ओर पत्थर से बनी मजबूत दीवार होती है । जल की अधिकता पर खड़ीन भर जाता है तथा जल आगे वाली खडीन में चला जाता है । खडीन में जल के सूख जाने पर, इसमें कृषि की जाती है।
2. तालाब-राजस्थान में प्राय: वर्षा के जल का संग्रहण तालाब में किया जाता है। यहाँ स्त्रियों व पुरुषों के नहाने के पृथक् से घाट होते हैं। तालाब की तलहटी में कुआं बना होता है, जिसे बेरी कहते हैं। जल संचयन की यह प्राचीन विधि आज भी अपना महत्व रखती है। इससे भूमि जल का स्तर बढ़ता है।
4. बावड़ी-राजस्थान में बावड़ियों का अपना स्थान है । यह जल संग्रहण करने का प्राचीन तरीका है। यह गहरी होती है व इसमें उतरने के लिए सीढियाँ एवं तिबारे होते हैं तथा यह कलाकृतियों से सम्पन्न होती है ।
5. टांका: टांका एक भूमिगत जलाशय है जिसे वर्षा के जल को संग्रहित करने के लिए बनाया जाता है। टांका आमतौर पर एक वर्गाकार या आयताकार आकार का होता है और इसका निर्माण मिट्टी या पत्थर से किया जाता है। टांका के चारों ओर एक दीवार बनाई जाती है ताकि वर्षा का जल इसमें इकट्ठा हो सके।
प्र: कौनसा युग्म (बांध - जिला) सही सुमेलित नहीं है?
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6308c2e71ff92f3f9e752377- 1पांचना - करौलीfalse
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