Hindi Practice Question and Answer
8 Q: 'The thief ran away as soon as he saw the police.' वाक्य का सही हिन्दी रूपान्तरण क्या होगा?
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636a1c49d0e7792027f96910- 1पुलिस आई और चोर भाग गया।false
- 2पुलिस को देखते ही चोर भाग गया।true
- 3चोर भागा पुलिस आई।false
- 4पुलिस के आते ही चोर भाग गया।false
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Answer : 2. "पुलिस को देखते ही चोर भाग गया।"
Q: क्रियाविशेषण रहित वाक्य है
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6283a9513f7a1029b933fcbd- 1वह अचानक चला गया।false
- 2मेरी बात ध्यान से सुनो।false
- 3नौकर मालिक से खुश रहता है।true
- 4वह प्राय : यहाँ आया करते थे।false
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Answer : 3. "नौकर मालिक से खुश रहता है। "
Q: किस शब्द में 'अक' प्रत्यय का प्रयोग नहीं है?
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63a1a79d36fed95f3e0296c4- 1बालकtrue
- 2शिक्षकfalse
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- 4निंदकfalse
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Answer : 1. "बालक"
Q: किन समश्रुत भिन्नार्थक शब्दों का अर्थ भेद सुसंगत नहीं है?
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627010aee1e2a840c35cabb3- 1आसन - आसन्न = समीपस्थ - बैठने की विधिtrue
- 2पट - पटु = वस्त्र - निपुणfalse
- 3पृष्ट - पृष्ठ = पूछा हुआ - पीठfalse
- 4गौड़ - गौण = ब्राह्मणों की एक जाति - जो प्रधान न होfalse
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Answer : 1. "आसन - आसन्न = समीपस्थ - बैठने की विधि "
Q: किस वाक्य में विराम चिह्नों का सही प्रयोग नहीं है हुआ है?
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63ad5a394edf0d56993980b4- 1हे प्रभो! मुझे शक्ति दो।false
- 2वह घर आया या नहीं?false
- 3राम-राम! उसने यह क्या कर दिया?true
- 4तुम समझते हो कि वह निरा बालक है, परंतु वह ....... ।false
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Answer : 3. "राम-राम! उसने यह क्या कर दिया?"
Q: 'जमात के करामा ' का अर्थ है-
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6241d9b057683f2a3ebe67af- 1जमात में रहने वाले लोग खुराफात करते हैं।false
- 2जमात में रहकर लोग गड़बड़ियाँ करते हैं।false
- 3साथ रहने से कुछ - न - कुछ गड़बड़ होती है।false
- 4एकता में शक्ति होती है।true
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Answer : 4. "एकता में शक्ति होती है।"
Q:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नके उत्तर दीजिए :
इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
निम्न में से कौन - सा विकल्प जातिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा बनने का है?
1186 0621f451318802b47fa622540
621f451318802b47fa622540इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
- 1शून्यताfalse
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- 3उपयोगिताfalse
- 4दासत्वtrue
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Answer : 4. "दासत्व "
Q:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
सुखी, सफल और उत्तम जीवन जीने के लिए किए गए आचरण और प्रयत्नों का नाम ही धर्म है। देश, काल और सामाजिक मूल्यों की दृष्टि से संसार में भारी विविधता है , अतएव अपने - अपने ढंग से जीवन को पूर्णता की ओर ले जानेवाले विविध धर्मों के बीच भी ऊपर से विविधता दिखाई देती है। आदमी का स्वभाव है कि वह अपने विचारों और जीने के तौर तरीकों को तथा अपनी भाषा और खानपान को सर्वश्रेष्ठ मानता है तथा चाहता है कि लोग उसी का अनुसरण और अनुकरण करें; यथाशक्ति दूसरों से अपने धर्म को श्रेष्ठतर समझते हुए वह चाहता है कि सभी लोग उसे अपनाएँ। इसके लिए वह जोर - जबर्दस्ती को भी बुरा नहीं समझता। धर्म के नाम पर होनेवाले जातिगत विद्वेष, मारकाट और हिंसा के पीछे मनुष्य की यही स्वार्थ भावना काम करती है।
'उत्तम' का विलोम है
1185 06231e37eafe5316e153c3161
6231e37eafe5316e153c3161सुखी, सफल और उत्तम जीवन जीने के लिए किए गए आचरण और प्रयत्नों का नाम ही धर्म है। देश, काल और सामाजिक मूल्यों की दृष्टि से संसार में भारी विविधता है , अतएव अपने - अपने ढंग से जीवन को पूर्णता की ओर ले जानेवाले विविध धर्मों के बीच भी ऊपर से विविधता दिखाई देती है। आदमी का स्वभाव है कि वह अपने विचारों और जीने के तौर तरीकों को तथा अपनी भाषा और खानपान को सर्वश्रेष्ठ मानता है तथा चाहता है कि लोग उसी का अनुसरण और अनुकरण करें; यथाशक्ति दूसरों से अपने धर्म को श्रेष्ठतर समझते हुए वह चाहता है कि सभी लोग उसे अपनाएँ। इसके लिए वह जोर - जबर्दस्ती को भी बुरा नहीं समझता। धर्म के नाम पर होनेवाले जातिगत विद्वेष, मारकाट और हिंसा के पीछे मनुष्य की यही स्वार्थ भावना काम करती है।
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