Hindi प्रश्न और उत्तर का अभ्यास करें
8 प्र: इनमें से किस विकल्प में सभी शब्द शुद्ध हैं?
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629f101ddf19be4c4af2c0b2- 1प्रतिनिधिक, पैतृकfalse
- 2अभ्यस्थ, आगामीfalse
- 3चरमोत्कर्ष, चवालीसtrue
- 4फाल्गुन, पुज्यfalse
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उत्तर : 3. "चरमोत्कर्ष, चवालीस "
प्र: किस शब्द में 'कु' उपसर्ग नहीं है?
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63908c5dd319b37ca1898ef3- 1कुरूपfalse
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उत्तर : 4. "कुशल"
व्याख्या :
1. 'कुशल' शब्द में 'कु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। क्योंकि 'कुशल' एक मूल शब्द है।
2. अन्य सभी में विकल्प 'कु + रूप = कुरूप, 'कु + कर्म = कुकर्म, कु + चाल = कुचाल' इन शब्दों में 'कु' उपसर्ग प्रयुक्त हुआ है।
3. 'कु' उपसर्ग अन्य उदाहरण में कुचलना (कु + चलना), कुदृष्टि (कु + दृष्टि), कुरूप (कु + रूप), कुशंका (कु + शंका) शामिल हैं।
प्र:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
जीवन के किसी भी क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष किया है और लक्ष्य प्राप्त किया है। ऐसा ही एक नाम है- सुधा चंद्रन पैर खराब होने के बावजूद वह चोटी की नृत्यांगना बनी। सुधा चंद्रन की माता श्रीमती धंगम एवं पिता श्री के. डी . चंद्रन की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी पुत्री राष्ट्रीय ख्याति की नृत्यांगना बने। इसीलिए चंद्रन दंपति ने सुधा को पाँच वर्ष की अल्पायु में ही मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय ' कला - सदन में प्रवेश दिलवाया। पहले पहल तो नृत्य विद्यालय के शिक्षकों ने इतनी छोटी उम्र की बच्ची के दाखिले में हिचकिचाहट महसूस की किंतु सुधा की प्रतिभा देखकर सुप्रसिद्ध नृत्य शिक्षक श्री के . एस. रामास्वामी भागवतार ने उसे शिष्या के रूप में स्वीकार कर लिया और सुधा उनसे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने लगी।
निम्न में से कौन सा शब्द शुद्ध है?
1274 062382636cd09f46e2f20ed4c
62382636cd09f46e2f20ed4cजीवन के किसी भी क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष किया है और लक्ष्य प्राप्त किया है। ऐसा ही एक नाम है- सुधा चंद्रन पैर खराब होने के बावजूद वह चोटी की नृत्यांगना बनी। सुधा चंद्रन की माता श्रीमती धंगम एवं पिता श्री के. डी . चंद्रन की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी पुत्री राष्ट्रीय ख्याति की नृत्यांगना बने। इसीलिए चंद्रन दंपति ने सुधा को पाँच वर्ष की अल्पायु में ही मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय ' कला - सदन में प्रवेश दिलवाया। पहले पहल तो नृत्य विद्यालय के शिक्षकों ने इतनी छोटी उम्र की बच्ची के दाखिले में हिचकिचाहट महसूस की किंतु सुधा की प्रतिभा देखकर सुप्रसिद्ध नृत्य शिक्षक श्री के . एस. रामास्वामी भागवतार ने उसे शिष्या के रूप में स्वीकार कर लिया और सुधा उनसे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने लगी।
- 1श्रीमतीtrue
- 2बावजुदfalse
- 3हिचकिआहटfalse
- 4उपरोक्त सभीfalse
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उत्तर : 1. "श्रीमती"
प्र: किस विकल्प में क्रिया 'द्विकर्मक' रूप में प्रयुक्त हुई है?
1272 063a1a1d09226db5b77ea368b
63a1a1d09226db5b77ea368b- 1अध्यापक ने विद्यार्थियों को पाठ पढ़ाया।true
- 2वह सुबह पढ़ाई करता है और शाम को खेलता है।false
- 3मैं बाजार से सब्जी और फल खरीद लाया।false
- 4मदारी के करतब देखकर दर्शक खूब हँसे।false
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उत्तर : 1. "अध्यापक ने विद्यार्थियों को पाठ पढ़ाया।"
प्र:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
सुखी, सफल और उत्तम जीवन जीने के लिए किए गए आचरण और प्रयत्नों का नाम ही धर्म है। देश, काल और सामाजिक मूल्यों की दृष्टि से संसार में भारी विविधता है , अतएव अपने - अपने ढंग से जीवन को पूर्णता की ओर ले जानेवाले विविध धर्मों के बीच भी ऊपर से विविधता दिखाई देती है। आदमी का स्वभाव है कि वह अपने विचारों और जीने के तौर तरीकों को तथा अपनी भाषा और खानपान को सर्वश्रेष्ठ मानता है तथा चाहता है कि लोग उसी का अनुसरण और अनुकरण करें; यथाशक्ति दूसरों से अपने धर्म को श्रेष्ठतर समझते हुए वह चाहता है कि सभी लोग उसे अपनाएँ। इसके लिए वह जोर - जबर्दस्ती को भी बुरा नहीं समझता। धर्म के नाम पर होनेवाले जातिगत विद्वेष, मारकाट और हिंसा के पीछे मनुष्य की यही स्वार्थ भावना काम करती है।
'उत्तम' का विलोम है
1271 06231e37eafe5316e153c3161
6231e37eafe5316e153c3161सुखी, सफल और उत्तम जीवन जीने के लिए किए गए आचरण और प्रयत्नों का नाम ही धर्म है। देश, काल और सामाजिक मूल्यों की दृष्टि से संसार में भारी विविधता है , अतएव अपने - अपने ढंग से जीवन को पूर्णता की ओर ले जानेवाले विविध धर्मों के बीच भी ऊपर से विविधता दिखाई देती है। आदमी का स्वभाव है कि वह अपने विचारों और जीने के तौर तरीकों को तथा अपनी भाषा और खानपान को सर्वश्रेष्ठ मानता है तथा चाहता है कि लोग उसी का अनुसरण और अनुकरण करें; यथाशक्ति दूसरों से अपने धर्म को श्रेष्ठतर समझते हुए वह चाहता है कि सभी लोग उसे अपनाएँ। इसके लिए वह जोर - जबर्दस्ती को भी बुरा नहीं समझता। धर्म के नाम पर होनेवाले जातिगत विद्वेष, मारकाट और हिंसा के पीछे मनुष्य की यही स्वार्थ भावना काम करती है।
- 1अगमfalse
- 2अधमtrue
- 3उच्चfalse
- 4अज्ञfalse
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उत्तर : 2. "अधम "
प्र:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
आचार्य द्रोण महर्षि भरद्वाज के पुत्र थे। पांचाल - नरेश का पुत्र द्रुपद भी द्रोण के साथ ही भरद्वाज - आश्रम में शिक्षा पा रहा था। दोनों में गहरी मित्रता थी। कभी - कभी राजकुमार द्रुपद उत्साह में आकर दोण से यहाँ तक कह देता था कि पांचाल देश का राजा बन जाने पर मैं आधा राज्य तुम्हें दे दूँगा। शक्षा समाप्त होने पर द्रोणाचार्य ने कृपाचार्य की बहन से ब्याह कर लिया। उससे उनके एक पुत्र हुआ, जिसका नाम उन्होंने अश्वत्थामा रखा । द्रोण अपनी पत्नी और पुत्र को बड़ा प्रेम करते थे। द्रोण बड़े गरीब थे। वह चाहते थे कि धन गप्त किया जाए और अपनी पत्नी व पुत्र के साथ सुख से रहा जाए । उन्हें खबर लगी कि परशुराम अपनी सारी संपत्ति गरीब ब्राह्मणों को बाँट रहे हैं , तो भागे - भागे उनके पास गए , लेकिन उनके नहुँचने तक परशुराम अपनी सारी संपत्ति वितरित कर चुके थे और वन - गमन की तैयारी कर रहे थे । दोण को देखकर वह बोले- " ब्राह्मण श्रेष्ठ ! आपका स्वागत है। पर मेरे पास जो कुछ था , वह मैं बाँट चुका हूँ । अब यह मेरा शरीर और धनुर्विद्या ही है। बताइए, मैं आपके लिए क्या करूँ? "
राजकुमार में कौन सा समास है?
1271 06231e6309980d16e3644134a
6231e6309980d16e3644134aआचार्य द्रोण महर्षि भरद्वाज के पुत्र थे। पांचाल - नरेश का पुत्र द्रुपद भी द्रोण के साथ ही भरद्वाज - आश्रम में शिक्षा पा रहा था। दोनों में गहरी मित्रता थी। कभी - कभी राजकुमार द्रुपद उत्साह में आकर दोण से यहाँ तक कह देता था कि पांचाल देश का राजा बन जाने पर मैं आधा राज्य तुम्हें दे दूँगा। शक्षा समाप्त होने पर द्रोणाचार्य ने कृपाचार्य की बहन से ब्याह कर लिया। उससे उनके एक पुत्र हुआ, जिसका नाम उन्होंने अश्वत्थामा रखा । द्रोण अपनी पत्नी और पुत्र को बड़ा प्रेम करते थे। द्रोण बड़े गरीब थे। वह चाहते थे कि धन गप्त किया जाए और अपनी पत्नी व पुत्र के साथ सुख से रहा जाए । उन्हें खबर लगी कि परशुराम अपनी सारी संपत्ति गरीब ब्राह्मणों को बाँट रहे हैं , तो भागे - भागे उनके पास गए , लेकिन उनके नहुँचने तक परशुराम अपनी सारी संपत्ति वितरित कर चुके थे और वन - गमन की तैयारी कर रहे थे । दोण को देखकर वह बोले- " ब्राह्मण श्रेष्ठ ! आपका स्वागत है। पर मेरे पास जो कुछ था , वह मैं बाँट चुका हूँ । अब यह मेरा शरीर और धनुर्विद्या ही है। बताइए, मैं आपके लिए क्या करूँ? "
- 1तत्पुरुष समासtrue
- 2कर्मधारय समासfalse
- 3अव्ययीभाव समासfalse
- 4द्विगु समासfalse
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उत्तर : 1. "तत्पुरुष समास"
प्र: “कर्णधार सँभालकर तलवार अपनी बाँधना" इस पंक्ति म कौनसी शब्द शक्ति है?
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63ac3b00612ead74ab550363- 1अभिधाfalse
- 2लक्षणाfalse
- 3व्यंजनाtrue
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उत्तर : 3. " व्यंजना"
प्र: संज्ञा शब्द से बना विशेषण नहीं है -
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636a52a95c30150185d5e791- 1नमकीनfalse
- 2दयालुfalse
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