Hindi प्रश्न और उत्तर का अभ्यास करें
8 प्र:निम्न गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नोंमें सबसे उचित विकल्प चुनिए-
कोई भी समाज शून्य में जीवित नहीं रह सकता। उसे अपने लोगों, अपने पशुओं, अपनी जमीन, अपने पेड़ - पौधों, अपने कुएँ, अपने तालाबों, अपने खेतों के लिए कोई - न - कोई ऐसी व्यवस्था बनानी पड़ती है जो समयसिद्ध और स्वयंसिद्ध हो। काल के किसी खण्ड विशेष में समाज के सभी सदस्यों के साथ मिल - जुलकर जो व्यवस्था बनती है, उसे फिर सभी सदस्य मिल - जुलकर पाल - पोसकर बड़ा करते हैं और मजबूत बनाते हैं। अपने ऊपर खुद लगाया हुआ यह अनुशासन एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपा जाता है।
' जीवित ' का विलोम है-
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625592931b65fd61bf51d9d4कोई भी समाज शून्य में जीवित नहीं रह सकता। उसे अपने लोगों, अपने पशुओं, अपनी जमीन, अपने पेड़ - पौधों, अपने कुएँ, अपने तालाबों, अपने खेतों के लिए कोई - न - कोई ऐसी व्यवस्था बनानी पड़ती है जो समयसिद्ध और स्वयंसिद्ध हो। काल के किसी खण्ड विशेष में समाज के सभी सदस्यों के साथ मिल - जुलकर जो व्यवस्था बनती है, उसे फिर सभी सदस्य मिल - जुलकर पाल - पोसकर बड़ा करते हैं और मजबूत बनाते हैं। अपने ऊपर खुद लगाया हुआ यह अनुशासन एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपा जाता है।
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उत्तर : 4. "मृत"
प्र: किस विकल्प में 'कृति-कृती' का सही अर्थ-भेद है?
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636a25a85c30150185d38a86- 1श्रद्धेय, संपन्नfalse
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उत्तर : 2. "रचना, चतुर"
प्र: 'अति + आचार' का शुद्ध संधियुक्त शब्द है-
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632db28c31300b7ce47a870e- 1अतिआचारfalse
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उत्तर : 2. "अत्याचार"
प्र: व्याकरण में सन्धि का अर्थ है-
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6332ce872ff7535af6722bc0- 1दो शब्दों का मेलfalse
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- 3प्रथम पद के अन्तिम तथा द्वितीय पद के प्रथम वर्ण में मेलtrue
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उत्तर : 3. "प्रथम पद के अन्तिम तथा द्वितीय पद के प्रथम वर्ण में मेल"
प्र: इनमें 'पूजा' शब्द का समानार्थी शब्द नहीं है –
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6332be1f31300b7ce48ef18c- 1अर्चनाfalse
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उत्तर : 3. "विकास"
प्र: इनमें सर्वनाम से बनी भाववाचक संज्ञा है-
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63a0583be1cd1e14922a10e6- 1अपनापनtrue
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उत्तर : 1. "अपनापन"
प्र: निम्नलिखित में 'संकेतार्थ वृत्ति' का उदाहरण है:
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63a1a8ed7e4e595f6183c47b- 1उसने अपना कार्य कर लिया है।false
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- 3यदि तुम पढ़ाई करते तो उत्तीर्ण हो जाते।true
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उत्तर : 3. "यदि तुम पढ़ाई करते तो उत्तीर्ण हो जाते।"
प्र:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
जीवन के किसी भी क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष किया है और लक्ष्य प्राप्त किया है। ऐसा ही एक नाम है- सुधा चंद्रन पैर खराब होने के बावजूद वह चोटी की नृत्यांगना बनी। सुधा चंद्रन की माता श्रीमती धंगम एवं पिता श्री के. डी . चंद्रन की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी पुत्री राष्ट्रीय ख्याति की नृत्यांगना बने। इसीलिए चंद्रन दंपति ने सुधा को पाँच वर्ष की अल्पायु में ही मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय ' कला - सदन में प्रवेश दिलवाया। पहले पहल तो नृत्य विद्यालय के शिक्षकों ने इतनी छोटी उम्र की बच्ची के दाखिले में हिचकिचाहट महसूस की किंतु सुधा की प्रतिभा देखकर सुप्रसिद्ध नृत्य शिक्षक श्री के . एस. रामास्वामी भागवतार ने उसे शिष्या के रूप में स्वीकार कर लिया और सुधा उनसे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने लगी।
विद्यालय की सन्धि क्या है?
1129 0623826c79980d16e36555fbb
623826c79980d16e36555fbbजीवन के किसी भी क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष किया है और लक्ष्य प्राप्त किया है। ऐसा ही एक नाम है- सुधा चंद्रन पैर खराब होने के बावजूद वह चोटी की नृत्यांगना बनी। सुधा चंद्रन की माता श्रीमती धंगम एवं पिता श्री के. डी . चंद्रन की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी पुत्री राष्ट्रीय ख्याति की नृत्यांगना बने। इसीलिए चंद्रन दंपति ने सुधा को पाँच वर्ष की अल्पायु में ही मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय ' कला - सदन में प्रवेश दिलवाया। पहले पहल तो नृत्य विद्यालय के शिक्षकों ने इतनी छोटी उम्र की बच्ची के दाखिले में हिचकिचाहट महसूस की किंतु सुधा की प्रतिभा देखकर सुप्रसिद्ध नृत्य शिक्षक श्री के . एस. रामास्वामी भागवतार ने उसे शिष्या के रूप में स्वीकार कर लिया और सुधा उनसे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने लगी।
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