Rajasthan Art History and Culture प्रश्न और उत्तर का अभ्यास करें
8 प्र: मिरज़ाई , दुतई और डगला किसके प्रकार हैं ?
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61e839ee728ca81eb9f6b1c6- 1पगड़ी केfalse
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उत्तर : 3. "अंगरखी के "
प्र: चम्पाकली आभूषण शरीर के किस अंग पर पहना जाता है ?
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5f7d6f2790b25c12b1f0eb8f- 1सिरfalse
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उत्तर : 4. "गर्दन "
प्र: तोरावाटी, काठैड़ा, राजावाटी बोलियों का सम्बन्ध किस क्षेत्र से है?
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60a783c4a5b13426b7f0b714- 1हाड़ौतीfalse
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उत्तर : 3. "ढूँढाडी"
प्र: चरणोत क्या था ?
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5e55fa537e67ef3c49203753- 1भूमि के क्रय पर देय लागfalse
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उत्तर : 4. "पशु चराई कर"
प्र: रुक्खा में बाबा रामदेव ने किस पंथ की शुरुआत की थी?
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5fdaf1e52e6e2d68d772d935- 1हिन्दू धर्मfalse
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उत्तर : 4. "कामदिया पंथ"
व्याख्या :
बाबा रामदेवजी मुस्लिमों के भी आराध्य हैं और वे उन्हें रामसा पीर या रामशाह पीर के नाम से पूजते हैं। रामदेवजी के पास चमत्कारी शक्तियां थी तथा उनकी ख्याति दूर दूर तक फैली। किंवदंती के अनुसार मक्का से पांच पीर रामदेव की शक्तियों का परीक्षण करने आए।
प्र: भील जनजाति के पुरुष कमर पर जो वस्त्र लपेटा करते हैं, उसे क्या कहा जाता हैं?
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6408b9d9a37bb1a5e16b5abe- 1जामाfalse
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उत्तर : 4. "खोय "
व्याख्या :
सही उत्तर खोयातु है। भील जनजाति के पुरुष खोयातु को अपनी कमर में लपेटते हैं। भील पुरुषों की पोशाक में एक पगड़ी या 'फ़ेटा', एक 'अंगी', अंगरखा और एक निचला परिधान शामिल होता है जिसे 'पोटारियो' कहा जाता है। उनके द्वारा कमर से घुटनों तक पहनी जाने वाली धोती को "थेफरा या ढेपड़ा" कहा जाता है।
प्र: निम्न में से कौन दादू पंथ की शाखाओं में सम्मिलित नहीं है?
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62a08737cae9f820bae56bb6- 1विरक्तfalse
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उत्तर : 3. "गौड़ीय "
व्याख्या :
दादू पंथ की शाखाएं
दादूजी की मृत्यु के बाद दादू पंथ 6 शाखाओं में बंट गया था, जो निम्न हैं।
1. खालसा - यह दादू सम्प्रदाय की प्रधान पीठ नरैना से सम्बद्ध है। इस शाखा के मुखिया इनके पुत्र गरीबदास जी थे।
2. नागा - दादू सम्प्रदाय में नागापंथ की स्थापना संत सुन्दरदास जी ने की। नागा साधु अपने साथ हथियार रखते थे तथा जयपुर राज्य में दाखिली सैनिक के रूप में कार्य करते थे। जब इनके आतंक से जनता परेशान हो गई तो सवाई जयसिंह ने एक नियम बनाकर इनके शस्त्र रखने पर पाबंदी लगा दी।
3. विरक्त - ये रमते-फिरते दादू पंथी साधु थे जो गृहस्थियों को आदेश देते थे।
4. खाकी - ये शरीर पर भस्म लगाते थे तथा खाकी वस्त्र पहनते थे।
5. उत्तरादे - जो राजस्थान छोड़कर उत्तरी भारत की ओर चले गए थे।
6. निहंग - वे साधु जो घुमन्तु थे।
प्र: राजस्थान की प्रसिद्ध लोक कला "बेवाण" है-
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62e3e0694dfab16a0e3c21e8- 1खादी के कपड़े पर लोक देवता के जीवन को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करना।false
- 2लकड़ी से निर्मित सिंहासन जिस पर ठाकुरजी की मूर्ति को श्रृंगारित करके बैठाया जाता है।false
- 3लकड़ी से निर्मित तलवारनुमा आकृति जिसका उपयोग रामलीला नाटक में किया जाता है।false
- 4कपाटों युक्त लकड़ी से निर्मित मंदिरनुमा आकृति।true
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